Virtual currency

Virtual currency क्या होतीं हैं?? यह कैसें काम करती हैं ।

दोस्तों कारोबार करने के लिए currency का बहुत बड़ा योगदान हैं। बिना currency के कोई भी लेन-देन सहज रूप से सम्पादित नहीं हो सकता हैं। जैसें- आपको दुकान से कोई वस्तु खरीदनी हैं तो आप वस्तु के बदले मे उसे करेंसी देनी होती हैं। virtual currency का भी कुछ एसे ही हैं।

यह currency online ही ली-दी जाती हैं। इसका कोई फिजिकल रूप नहीं होता है। तो आईये आज समझते हैं कि virtual currency क्या होती हैं?? कैसें काम करती हैं?? इसके क्या-क्या लाभ,हानियाँ हैं?

चलिये शुरु करते हैं।

Virtual currency को अन्य कौन-कौनसे नामों से जाना जाता हैं?

Virtual currency को

  1. cryptocurrency (क्रिप्टोकरेंसी)
  2. Digital currency (डिजिटल करेंसी)
  3. Virtual currency ( आभासी करेंसी )

आदि अन्य नामों से जाना जाता हैं।

वर्चुअल करेंसी क्या होती हैं??

वर्चुअल करेंसी वह करेंसी जो आपको दिखाई नहीं देती हैं। अर्थात् यह डिजिटल फॉर्म में ही होतीं हैं। इसका कोई मूर्त रूप नहीं होता हैं। यह ओनलाईन ही लेन-देन की जाती हैं।

इस पर किसी बैंक या अथॉरिटी का कमांड नहीं होता हैं।इसलिए यह ऑल ऑवर वर्ल्ड सेंड और रिसीव की जा सकतीं हैं। इसलिए इसके मूल्यों में हमेशा उतार-चढ़ाव होता रहता हैं। इसलिए यह काफी ट्रेडिंग में हैं।

इसके लेनदेन में कोई अन्य शुल्क नहीं लगता है। इसलिए भी यह लोकप्रिय होता जा रहा है। इसके अलावा यह सुरक्षित और तेज है।  जिससे लोग वर्चुअल करेंसी स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। इसमे किसी अन्य कार्डस की तरह कोई लिमिट्स भी नहीं होती है। लेने और देने वाले की पहचान किए बिना पूरे वर्चुअल करेंसी नेटवर्क के प्रत्येक लेन-देन के बारे में पता किया जा सकता है। यह एकदम सुरक्षित और सुपर फास्ट है। यह लेन-देन दुनिया में कहीं भी ,किसी भी देश में किया जा सकता हैं।

आज भी कई सारे लोग एसे हैं जिनके पास बैंकिंग सुविधा नहीं है। या बैंक द्वारा दी जाने वाली समस्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन दूसरी तरफ उन लोगों की संख्या अधिक है जिनके पास इंटरनेट के साथ सेल फोन अवेलेबल है। इसलिए यह वर्चुअल करेंसी की वजह से व्यापार कर सकते हैं। क्योंकि इस पर किसी व्यक्ति विशेष सरकार या कंपनी का कोई स्वामित्व नहीं होता है। आज वर्चुअल करेंसी काफी प्रसिद्ध है। उन हजारों लोगों से ताकत मिलती है जिनके पास विशेष कंप्यूटर है, जो नेटवर्क को शक्ति संपन्न बनाते हैं। और नेट पर विनिमय को  सुरक्षित करते हैं और ट्रांजैक्शन की जांच करते हैं।

वर्चुअल करेंसी कैसें काम करती हैं??

यह करेंसी blockchain technology पर आधारित हैं। ये technology सिक्योर और फास्ट हैं। ये करेंसी डिजिटल वॉलेट में रखी जाती हैं। इसके लिये बहुत प्रकार के wallet होते हैं।

Blockchain technology क्या होती हैं??

इस तकनीक में Amount को ट्रांसफर करने के लिए क्रेता और विक्रेता के बीच किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं होती है। अर्थात Amount विक्रेता से सीधा क्रेता के Account में जाता है। बिचौलियों से आशय है कि जब हम सामान्य Amount ट्रांसफर करते हैं तो बिचौलिए में बैंक वगैराह आते हैं जिनका की ट्रांजैक्शन शुल्क अधिक होता है।

जबकि ब्लॉकचेन में किसी तीसरे पक्ष (बिचौलिया की) आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए यह प्रणाली बहुत ही सुरक्षित और फास्ट होती है।

वर्चुअल करेंसी के लिए Account कैसें बनाए??

इसका account बनाना बहुत ही आसान हैं। नीचे दिये गए किसी भी एक वॉलेट में Sign up करके सकतें हैं।

  1. desktop wallet
  2. Mobile wallet
  3. Web based wallet
  4. Hardware wallet

आदि। इसी प्रकार का कोई 1 वॉलेट लेकर account बनाना होता हैं, और यहाँ से address के रूप में एक यूनीक आई डी मिल जाती हैं।

अब आपको कही से वर्चुअल करेंसी लेनी हैं या देनी है तो आप इस address का यूज़ कर सकतें हैं।

वॉलेट से ही ये करेंसी बिना किसी agent और mediator के पूरे संसार में लेन-देन की जा सकती हैं।

Cryptocurrency legal or illegal in India

सुप्रीम कोर्ट ने 5 मार्च 2020 को cryptocurrency से बेन हटा दिया हैं। अब आप इसमें आसानी से लेन देन कर सकतें हैं।

आप BITCOIN, REDCOIN, सिया कोइन, सिस्कोईन, वॉईस कोइन, मोनरो आदि में आराम से लेन देन कर सकतें हैं।

इस करेंसी से क्या फायदे हैं??

  1. बिना अपनी जानकारी दिये ट्रांजैक्शन किये जा सकतें हैं।
  2. पूरे world में कही भी,किसी भी देश में, बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के ट्रांजैक्शन कर सकते हैं।
  3. बहुत बड़ा amount भी आसानी से ट्रांसफर किया जा सकता हैं,वह भी बहुत कम चार्ज में।
  4. सिक्योर ऐण्ड फास्ट ट्रांजैक्शन होते हैं।

इससे क्या नुकसान हैं??

  1. किसी भी कम्पनी या अथॉरिटी का कमांड नहीं होने के कारण अगर आपके वॉलीट में कोई error या प्रोब्लम आये या वॉलिट ID खो जाए तो आपके पैसों का नुकसान हो सकता है।
  2. इसमें पर्सनल इन्फोर्मेशन का उपयोग नहीं होता है। अत: कई सारे illegal काम होते हैं।
  3. कई गलती से amount सेंड हो जाए तो वापस करने के लिये कोई option नहीं बचता।
  4. इसकी price बहुत जल्दी अप- डाउन हो जाती हैं तो हमेशा रिस्क बना रहता हैं।
  5. सभी countries में लिगल नहीं होने के कारण सभी जगह उपयोग नहीं कर सकतें हैं।

लेकिन इसके फायदो को देखतें हुए नुकसान कम ही लगते हैं।इसलिए वर्चुअल करेंसी धीरे-धीरे प्रचलन में बढ़ती जा रहा हैं।

वर्चुअल करेंसी कैसें खरीदते हैं??

इसे खरीदना वैसा ही है जैसा सोना-चांदी खरीदना हैं। इसको आप किसी भी देश की मुद्रा से खरीद सकतें हैं।

  • Unocoin
  • zebpay
  • Bittrex
  • Coinify
  • Coinbase
  • Robin hood

आप Google करोगे तो पता चलेगा कि और भी कई सारी वेबसाइट हैं जो वर्चुअल करेंसी की सुविधा उपलब्ध करवाती हैं।

अगर आपको भारतीय रुपये मे खरीदना है तो नीचे कुछ वेबसाइट दे रखी हैं। वहाँ जाकर आप खरीद सकतें हैं।

  1. UNOCOIN – इसके founder “Abhinand Kaseti, Harish B V, Sunny Ray, Sathvik Vishwanath” हैं।
  2. Unocoin में account बनाने के लिए सबसे पहले इनकी वेबसाइट Unocoin पर जाकर Sign up करना होता हैं। जिसमे केवल मोबाईल नंबर की जरूरत होतीं हैं।
  3. ZEBPAY– इसके Founders: Sandeep Goenka, Mahin Gupta, Saurabh Agrawal हैं।
  4. इसमें भी account बनाना आसान हैं। इनकी वेबसाइट ZEBPAY पर जाकर Sign up कर सकतें हैं।

Virtual currency की खोज किसने की??

1982 में, कंप्यूटर वैज्ञानिक डेविड चाउम ने अनट्रेसेबल पेमेंट्स के लिए पेपर ब्लाइंड सिग्नेचर जारी किया। जो उस समय रिटेल स्टोर पर लगे इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन का विकल्प था।

उनके कागज को इतिहास में डिजिटल मुद्रा प्रस्तावों में से एक माना जाता है। उन्होंने अपने प्रस्ताव पर काम करना जारी रखा और अंततः 1990 में DigiCash नाम की एक कंपनी लॉन्च की थी। ताकि उनके विचारों और रिसर्च का व्यवसायीकरण हो सके।

1994 में पहली बार उनकी कंपनी ने इंटरनेट पर अपना पहला इलेक्ट्रॉनिक कैश ट्रांजेक्शन किया। इस प्रकार थर्ड पार्टी के बिना ट्रांजैक्शन पूरा किया गया।

फिर उनको लगा कि ऑनलाइन लेनदेन DigiCash एक कंपनी के रूप में लाभदायक साबित नहीं हो रहा था।

चाउम ने सोचा कि DigiCash ने बाजार में प्रवेश तो कर लिया। लेकिन ई-कॉमर्स पूरी तरह से इंटरनेट पर नहीं होने की वजह से प्रोब्लम आ रही थी।

1999 के एक साक्षात्कार में डेविड चाउम कहा, “वर्चुअल करेंसी को यूज़ करने वाले बाजार मे पर्याप्त व्यापारी नहीं होने की वजह से इसके ट्रांजैक्शन में काफी समस्याएँ आ रही हैं।

Virtual currency के कौन-कौन से प्रकार हैं??

वर्तमान समय में वर्चुअल करेंसी बहुत से प्रकार की प्रचलन में हैं। लेकिन कुछ प्रसिद्ध प्रकार जो ज्यादा प्रचलन में हैं वो इस प्रकार हैं।⬇️⬇️

  1. BITCOIN (BTC)
  2. LITECOIN (LTC)
  3. ETHEREUM (ETH)
  4. DOGECOIN (DOGE)
  5. FAIRCOIN (FAIR)
  6. PEERCOIN ( PPC)
  7. DASH (DASH)

और भी कई सारे हैं जो यह सुविधा उपलब्ध करवाते हैं।

लेकिन सबसे फेमस वर्चुअल करेंसी BITCOIN ही हैं। तो आइए BITCOIN के बारें में कुछ जान लेते हैं।

Bitcoins क्या होता हैं??

जब भी वर्चुअल करेंसी की बात होती हैं तो BITCOIN का नाम सबसे पहले आता है। क्योंकि दुनिया की सबसे पहली वर्चुअल करेंसी ये ही थी।

इसे Satoshi nakamoto ने सन 2009 में बनाया था।

Satoshi nakamoto कौन हैं??

इनका जन्म 5 अप्रेल 1975 को जापान मे हुआ माना जाता हैं। इन्होंने BITCOIN के साथ साथ blockchain का भी विकास किया। इन्होंने 2007 में BITCOIN पर काम करना शुरु किया था, और 2008 में एक डोमेन BITCOIN.ORG इनके नाम रजिस्टर्ड हैं। फिर जनवरी 2009 में इन्होंने BITCOIN SOFTWARE का वर्जन 0.1 को लॉन्च किया। 1 BITCOIN की कीमत शुरुआत में बहुत कम थी। लेकीन डिमांड के अनुसार इसकी कीमत बढ़ गई हैं।

लेकिन इसकी कीमत में बहुत उतार चढ़ाव देखने को मिलतें हैं। जोकि माँग और पूर्ति पर निर्भर करता है।

BITCOIN का मूल्य कैसें जानें??

BITCOIN keepyouupdate.com

BITCOIN की लाइव मूल्य देखने के लिए आप गूगल मे जाकर ” BITCOIN ” टाइप करें। वहाँ पर आपको इसका वर्तमान मूल्य मिल जायेगा। यह उपर नीचे होता रहता है।

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