Medical leave

medical leave rules in rajasthan government

दोस्तों! आप अगर राज्य कर्मचारी हैं तो यह पोस्ट आपके बहुत काम आने वाली हैं। इस पोस्ट में आज हम यह चर्चा करेंगे कि राजस्थान सर्विस में Medical leave के लिए क्या क्या-क्या नियम होते हैं।

चलिए शुरु करतें हैं।


1️⃣ अवकाश प्राप्त करना अधिकार नही है, एक कर्मचारी उसे देय अवकाश को अधिकार के रूप में नही
मांग सकता अवकाश स्वीकृत करने वाला अधिकारी जन हित में आवेदित अवकाश को अस्वीकृत कर
सकता है, कम कर सकता हैं, या स्वीकृत अवकाश को कम कर सकता हैं। लेकिन वह अवकाश की प्रकृति को नहीं बदल सकता हैं।

जैसें- किसी कर्मचारी ने CL के लिए अप्लाई किया हैं तो अधिकारी CL ही accept, reject कर सकता हैं। अर्थात् वह CL को medical leave या अन्य leave में नहीं बदल सकता हैं। -➡️ नियम-59


2️⃣ अवकाश की प्रकृति बदल सकता हैं कर्मचारी- कर्मचारी को सुविधा हैं की वह 90 दिन के में
ऐसा प्रार्थना-पत्र दे सकता है, जिससे अवकाश की प्रकृति बदली जा सकती हैं। अवकाश की प्रकृति बदलने पर अगर वेतन वसूली योग्य बनता है तो वसूली की जायेगी । और वेतन देय बनता है तो कर्मचारी को भुगतान किया जायेगा ।

Medical leave प्रार्थना-पत्र किसे प्रस्तुत किया जाये??

जो अधिकारी अवकाश में कमी या वृद्धि करने का अधिकार रखता हो उसके सक्षम प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करें ।

जैसें ➡️ विद्यालय में कार्यरत कार्मिक संस्था प्रधान को अपना अवकाश प्रार्थना -पत्र
प्रस्तुत करेंगें।और संस्था प्रधान अपने से उच्च अधिकारी पी ई ई ओ महोदय या जिला शिक्षा अधिकारी महोदय को प्रस्तुत करेंगे। ➡️ नियम- 67

Medical leave प्रमाण-पत्र कहाँ से बनवाए ??

प्राधिकृत चिकित्सक से मेडिकल प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

यदि राजपत्रित कर्मचारी को मेडिकल चाहिए तो 60 दिन तक का अवकाश चिकित्सा प्रमाण पत्र के आधार पर ही मान्य हो जाता हैं। लेकिन उससे
अधिक का मेडिकल लेने ले लिए प्राधिकृत अधिकारी से उच्चतर अधिकारी या मुख्य चिकित्साधिकारी या समकक्ष से चिकित्सा
प्रमाण-पत्र पर प्रतिहस्ताक्षर करवाये गये हो और अवकाश की अनुशंषा की गयी हो। तभी मान्य होगा। इसके साथ G.A. 45 संलग्न करना चाहिए ।➡️ नियम -70

✳ यदि किसी भर्ती के लिए मेडिकल बनवाना हो तो मेडिकल सर्टीफिकेट मुख्य चिकित्सा अधिकारी या इकाई प्रभारी से प्रतिहस्ताक्षरित होना चाहिए। ➡️ नियम-74

अराजपत्रित अधिकारी के लिए अवकाश

जहाँ पर प्राधिकृत चिकित्साधिकारी नही होता हैं। इस स्थिति में रजिस्टर्ड
मेडिकल प्रेक्टिशनर्स के प्रमाण-पत्र के आधार पर अवकाश लिया जा सकता है। लेकिन वह मेडीकल काउन्सिलं ऑफ इडिया से पंजीकृत होना चाहिए ।

🔆 होम्योपेथिक चिकित्सक का 15 दिन का प्रमाण-पत्र मान्य होगा | आदेश क्रमांक दिनांक 16.10.89

🔅 आयुर्वेद चिकित्सक एक बार में 15 दिन का अवकाश दे सकता हैं। बाद में इसे 7-7 दिन का बड़ाकर कुल 29 दिन तक का चिकित्सा अवकाश दे सकता हैं।

✳ चिकित्सा प्रमाण पत्र अवकाश प्राप्त करने का अधिकार पत्र नही है। मेडिकल एक सुविधा हैं,इसे अधिकार के रूप में उपयोग नही कर सकतें हैं। ➡️ नियम 79

कौनसा चिकित्सक कितने मेडिकल दे सकता हैं?

  1. 1-15 दिन का चिकित्सा अवकाश बहिरंग रोगी को किसी भी चिकित्सा अधिकारी द्वारा दिया जा सकता हैं।
  2. बहिरंग से आशय हैं- बहिरंग रोगी या बाह्य रोगी (outpatient) उन रोगियों को कहते हैं जो 24 घण्टे से कम के लिए अस्पताल में दाखिल होते हैं।
  3. 15 से 30 दिन का अवकाश वरिष्ठ अधिकारी दे सकता है इसमें मूल अवधि शामिल होगी ।
  4. 30 से 45 दिन तक वरिष्ठ विशेषज्ञ या समकक्ष स्तर के अधिकारी दे सकते हैं।
  5. 45 दिन से अधिक दिन का अवकाश मेडिकल बोर्ड द्वारा दिया जा सकेगा। जिसमे मूल अवधि शामिल होगी।
  6. एक मेडिकल अवकाश 12 घंटे का ही माना जाता हैं। 24 घन्टे के लिए 2 मेडिकल बनते हैं।
  7. अगर आपके मेडिकल समयावधि में कोई सरकारी छुट्टियाँ आती हैं तो वह भी मेडिकल में ही गिनी जायेगीं।
  8. जहाँ आवश्यक हो महिला चिकित्सक की राय आवश्यक सदस्य के रूप में ली जानी चाहिए ।
  9. आयुर्वेद के अन्तरंग रोगी के लिए 30 दिन से अधिक पर प्रभारी के प्रतिहस्ताक्षर होने चाहिए।
  10. अंतरंग रोगी (inpatient) वे हैं जो अस्पताल में ‘admit’ होकर वहाँ रात बिताते हैं, लगातार कई दिन, कभी-कभी कई सप्ताह या की माह भी बिता सकते हैं
  11. चिकित्सा अवकाश उपभोग के बाद सेवा पर उपस्थिति के समय आरोग्य प्रमाण-पत्र दिया जाना चाहिए।
  12. उसके बिना कार्य ग्रहण नही करवाये।
  13. एक राज्य कर्मचारी को 20 अर्द्धवेतन अवकाश कार्यग्रहण तिथि से एक वर्ष में जोडे जायेगे । उपभोग करने पर दोगुनी मात्रा में काटे जायेगें।

सारांश

मैं आशा करता हूँ कि आपकों आपके सभी सवालों का जवाब मिल गया होगा। एसे ही जानकारियां के लिए विजिट करते रहिए। keepyouupdate.com

धन्यवाद।

Source- RSR BOOK

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