स्थानांतरण

जानिए राजस्थान में शिक्षक स्थानांतरण नीति कैसी हो सकती है-⬇️

अभी कुछ दिन पहलें दिंनाक 03/01/2020 को एक आदेश आया था कि राजस्थान में स्थानांतरण नीति पंजाब,दिल्ली,आन्ध्र प्रदेश की नीतियों का परिक्षण करके बनाई जायेगीं, तो आओं हम जानते है की इन राज्यो की क्या पोलीसी है

पंजाब सरकार की नई स्थानांतरण पॉलिसी (2018)क्या है, आओं जानते है—-

पंजाब कैबिनेट ने शिक्षकों की ट्रांसफर को सरल बनाते हुए नई ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। यह पॉलिसी 1 अप्रैल से लागू होगी। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सभी विभागों से कहा कि ट्रांसफर पॉलिसी को कर्मचारियों की योग्यता के आधार पर तैयार किया जाए।

मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी, सात साल के बाद अनिवार्य रूप से किया जाएगा स्थानांतरण

नई ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी ईटीटी, एचटी, सीएचटी, मास्टर सीएंडवी लेक्चरर, वोकेशनल मास्टर, प्रिंसिपल और हेड मास्टर आदि सभी पर लागू होगी। यह पॉलिसी सेवानिवृत्ति के बाद एक्टेंशन पर काम कर रहे, ब्लॉक अधिकारी, जिला अधिकारी, प्रिंसिपल डाइट के पद पॉलिसी के अंतर्गत नहीं आएंगे।

7 साल बाद अनिवार्य स्थानांतरण

पॉलिसी में एक विशेष क्षेत्र व स्कूल में सात साल की सेवा के बाद अनिवार्य रूप से स्थानांतरित किया जाएगा। नई पॉलिसी में एक शिक्षक के लिए एक विशेष स्टेशन पर तीन साल तक अपनी सेवाएं दिए बिना ट्रांसफर के लिए आवेदन नहीं करने के नियम में बदलाव किया गया है। अब यह अवधि एक साल की होगी।

लेकिन नए शिक्षकों के लिए एक स्टेशन पर तीन साल सेवा देना अनिवार्य होगा। हालांकि, नवविवाहित शिक्षक तीन साल में एक बार ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकती है।

कैंसर मरीजों, दिव्यांगों को मनचाही ट्रांसफर

कैंसर समेत गंभीर बीमारियों से पीडि़त, 60 फीसदी विकलांग, तलाकशुदा, मानसिक रूप से विकलांग बच्चों के अभिभावक और शहीदों की विधवाओं को मनचाही जगह पर ट्रांसफर किया जाएगा।

खराब प्रदर्शन पर भी होगा तबादला

शिकायत या खराब प्रदर्शन के कारण, शिक्षकों को प्रशासनिक आधार पर किसी भी समय स्थानांतरित किया जा सकता है। तबादलों के दो दौर होंगे। तबादलों के पहले दौर के बाद, पात्र शिक्षक पहले दौर में स्थानांतरण के कारण बनाई गई रिक्तियों के खिलाफ स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकते थे।

निजी विद्यालयों पर शिकंजा

अगर किसी भी मामले में अध्यापक का कोई रिश्तेदार 15  किलोमीटर के दायरे में प्राइवेट शिक्षा संस्थान चला रहा होगा तो उसे 15 किलोमीटर के बाहर भेजा जाएगा। नीति के अनुसार जिला मुख्यालयों के नगरपालिका क्षेत्र के भीतर स्थित स्कूलों से स्थानांतरण करने वाले शिक्षकों को 20 अंक दिए जा सकते हैं।

ये स्कूल शामिल नहीं

जिला मुख्यालयों के शहर के नगरपालिका क्षेत्र की सीमा से शुरू होने वाले 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित स्कूल और शहर में स्थित स्कूल इसमें शामिल नहीं होंगे।

इसके तहसील मुख्यालयों के शहर व साथ ही 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित ऐसे स्कूलों को भी राहत दी गई है, जो नगर निगम की सीमा से शुरू होते हैं

नई ट्रांसफर पालिसी के अनुसार सरकारी कर्मचारी या अफसर एक जिले में सात साल से ज्यादा नहीं रह पाएंगे।

➡️पंजाब सरकार ने वर्ष 2016-17 के लिए अधिकारियों के लिए ये ट्रांसफर पालिसी जारी की थी —-

—‘सरकारी प्रवक्ता के अनुसार सरकारी अफसर एक स्थान पर कम से कम तीन साल और ज्यादा से ज्यादा पांच साल तक तैनात रह पाएंगे।ग्रुप ए और बी के अफसरों को पूरे कार्यकाल के दौरान किसी एक जिले में सात साल से ज्यादा तैनात नहीं किया जाएगा।

जिन कार्यालयों में अफसरों का लोगों से ज्यादा कामकाज होता है, वहां अफसर एक स्थान पर दो साल से ज्यादा नहीं रहेगा।

3 साल पहले स्थानांतरण नहीं

प्रवक्ता के अनुसार यदि किसी कर्मचारी का एक स्थान में तीन साल का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है, उन्हें सिर्फ किसी शिकायत या किसी ठोस प्रशासनिक कार्यों के कारण ही स्थानांतरित किया जाएगा।

इसके अलावा कंडी, बेट या सीमांत इलाकों में तैनात होने वाले अफसरों और कर्मचारियों को एक स्थान पर कम से कम दो साल तैनात रहना होगा। प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने इस बार कम से कम स्थानांतरण करने का फैसला लिया है। स्थानांतरण सिर्फ प्रशासनिक कारणों, खाली पदों को भरने या फिर किसी जरूरतमंद की परिस्थितियों को देखते हुए की जाएंगी।

एक स्थान पर अधिकतम 5 साल

प्रवक्ता के अनुसार पति-पत्नी दोनों सरकारी नौकरी में हैं, तो नई पालिसी के तहत उन्हें एक ही स्थान पर पांच साल तक रखा जा सकता है

उसके बाद उन्हें अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा। यदि पति निजी कंपनी में हैं और उनकी पत्नी सरकारी नौकरी में है, तो उनके साथ भी यही पालिसी अपनाई जाएगी। हालांकि अविवाहित या विधवाओं को जहां तक हो सके, उनकी इच्छा वाले स्थान पर ही तैनात किया जाएगा।

दम्पति को प्राथमिकता

इतना ही नहीं, अविवाहित युवती या विधवाओं को दंपति के मुकाबले प्राथमिकता दी जाएगी। अपाहिज या नेत्रहीन कर्मचारियों को उनकी इच्छा वाले स्थान पर नियुक्त करने का पूरा प्रयास किया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों को उनके घर के पास ही तैनात किया जाएगा। इसके अलावा जिन सरकारी अफसरों या कर्मचारियों के बच्चे दिमागी तौर से अपाहिज होंगे, उन्हें उनकी इच्छा वाले स्थान पर तैनात करने की कोशिश की जाएगी।

सारांश

ये सब जो ऊपर लिखा हैं पंजाब सरकार की स्थानांतरण नीतियाँ हैं,राजस्थान में कैसी नीति आये,ये सब सरकारी आदेशों पर ही निर्भर है।————

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